दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, केजरीवाल-सिसोदिया समेत कई AAP नेताओं को अवमानना नोटिस; सोशल मीडिया पोस्ट बने विवाद की वजह
नई दिल्ली, 19 मई 2026 । दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बड़ा झटका देते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और अन्य नेताओं को आपराधिक अवमानना मामले में नोटिस जारी किया है। मामला कथित तौर पर एक हाई कोर्ट जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई “अपमानजनक” और “विलिफाइंग” पोस्ट्स से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला और क्यों शुरू हुई अवमानना की कार्रवाई?
यह पूरा विवाद आबकारी नीति (Excise Policy) मामले से जुड़ा हुआ है। दरअसल, जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 14 मई को खुद इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। जस्टिस शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कानूनी रास्ते अपनाने के बजाय उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर बदनामी का एक “सोचा-समझा अभियान” चलाया।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई के दौरान सामने आया। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से ऐसी सामग्री साझा की गई, जिससे न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी। दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने संबंधित नेताओं को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ इस प्रकार के सार्वजनिक अभियान अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा असर डालते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन पोस्ट्स और बयानों को लेकर विवाद हुआ, उनमें अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। कुछ नेताओं ने कथित तौर पर यह तक कहा कि उन्हें कोर्ट से न्याय की उम्मीद नहीं है। अदालत ने इन टिप्पणियों को Contempt of Courts Act के तहत गंभीर माना।
यह मामला उस समय और ज्यादा चर्चाओं में आ गया जब जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने बाद में एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। अरविंद केजरीवाल ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी और नैतिक जीत की बात कही।
अब इस मामले की अगली सुनवाई नई बेंच के सामने होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत को आरोप सही लगते हैं तो संबंधित नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीति और न्यायपालिका के बीच बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।