1973 में मृत घोषित व्यक्ति को कागजों में दिखाया जिंदा, फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही मचा हड़कंप

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यमुनानगर , 18 मई 2026 । यमुनानगर में एक चौंकाने वाले मामले में वर्ष 1973 में मृत हो चुके व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा दिखाने का खुलासा हुआ है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पता चला कि मृत व्यक्ति की पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया।

मोहन लाल ने प्रॉपर्टी डीलर धर्म नारायण के खिलाफ आरोप लगाया है कि उसने 1973 में मृत व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाए। इस मृत व्यक्ति के नाम पर न केवल फर्जी पहचान पत्र और पैन कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज तैयार किए गए, बल्कि साल 2017 में किसी डमी (फर्जी) व्यक्ति को सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में खड़ा कर वसीयत भी अपने नाम करवा ली गई।

सूत्रों के मुताबिक मामला तब सामने आया जब जमीन, संपत्ति या सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। जांच अधिकारियों को रिकॉर्ड में कई संदिग्ध एंट्री मिलीं, जिसके बाद विस्तृत पड़ताल शुरू की गई। इसी दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस व्यक्ति को दशकों पहले मृत घोषित किया जा चुका था, उसे आधिकारिक कागजों में जीवित दिखाया गया।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि मृत व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर संपत्ति, सरकारी लाभ या अन्य कानूनी अधिकार हासिल करने की कोशिश की गई। मामले में फर्जी दस्तावेज, पहचान पत्र और रिकॉर्ड में हेरफेर की भी जांच की जा रही है।

प्रशासन ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब कर ली है और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी और धोखाधड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है that पुराने रिकॉर्ड और मैनुअल दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण इस तरह के मामलों की संभावना बनी रहती है। यही वजह है कि अब डिजिटल रिकॉर्ड सत्यापन और आधार आधारित पहचान प्रणाली को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

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