“Compromised PM ने व्यापार समझौता नहीं, अडानी की रिहाई का सौदा किया” — राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

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नई दिल्ली, 15 मई 2026 । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के हितों की बजाय कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की राजनीति की जा रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हालिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और विदेश नीति के फैसलों के पीछे राष्ट्रीय हित नहीं, बल्कि कारोबारी हितों को प्राथमिकता दी गई।

राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार द्वारा किए गए कई फैसलों का सीधा लाभ Gautam Adani समूह को मिला है। उन्होंने कहा कि “व्यापार समझौता” के नाम पर देश को गुमराह किया जा रहा है और असल उद्देश्य अडानी समूह को कानूनी और आर्थिक राहत दिलाना है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां पारदर्शिता से दूर हैं और संसद में इन मुद्दों पर चर्चा से बचा जा रहा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”’कंप्रोमाइज्ड, पीएम’ ने व्यापार समझौता नहीं, अदाणी की रिहाई का सौदा किया।” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि अब यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्यों सहमत हुए और उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोक दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया जा रहा है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनता से जोड़ते हुए कहा कि जब देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता बढ़ रही है, तब सरकार बड़े उद्योगपतियों के हित साधने में लगी हुई है। पार्टी नेताओं ने इसे “क्रोनी कैपिटलिज्म” का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

वहीं भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक स्टंट बताया। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस लगातार देश की आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि सरकार के सभी फैसले राष्ट्रीय हित और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले अडानी मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

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