बिहार , 05 मई 2026 । बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बिहार में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, विस्तार की तारीख तय कर ली गई है और मंत्रियों की सूची पर अंतिम मुहर अमित शाह के साथ बैठक में लगाई गई है। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली से लेकर पटना तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
नीतीश-सम्राट की मुलाकात और कैबिनेट विस्तार
एक अहम राजनीतिक कदम उठाते हुए, सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और JD(U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से भी मुलाकात की। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को NDA गठबंधन के भीतर एकता का एक मजबूत संदेश और विपक्ष के नैरेटिव का मुक़ाबला करने की एक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालयों का बंटवारा गठबंधन के सभी साथियों- भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा- के बीच सोच-समझकर किया जाएगा। इस रणनीति का मकसद जातिगत समीकरणों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और अनुभवी तथा नए चेहरों के सही तालमेल को बनाए रखना है।
जानकारी के अनुसार, कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का खास ध्यान रखा गया है। नए चेहरों के साथ-साथ कुछ अनुभवी नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है, ताकि सरकार के कामकाज को और प्रभावी बनाया जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसमें विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह जल्द ही आयोजित किया जाएगा, जिसमें नए मंत्री अपने पद की शपथ लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे राज्य की राजनीति की दिशा तय हो सकती है।