‘खलनायकों का महिमामंडन पीढ़ियों के लिए नुकसानदायक’: CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

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वाराणसी ,  04 अप्रैल 2026 । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज और खासकर युवाओं पर पड़ने वाले सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि खलनायकों (विलेन) का महिमामंडन आने वाली पीढ़ियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे गलत संदेश जाता है और युवाओं की सोच पर नकारात्मक असर पड़ता है।

वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति के दौरान शुक्रवार को आदित्यनाथ ने कहा कि यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि नयी पीढ़ी को मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा था जब फिल्मों में अच्छे पात्रों को खलनायक और खलनायकों को नायक के रूप में दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ी। इसका परिणाम यह हुआ कि पीढ़ियां प्रभावित हुईं और समाज में आदर्शों का अभाव देखने को मिला।”

योगी आदित्यनाथ का मानना है कि फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य माध्यमों में अपराधियों या नकारात्मक किरदारों को ग्लोरिफाई करने से समाज में गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सकारात्मक और प्रेरणादायक किरदारों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज के सामने सही आदर्श प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ लोगों की आवाज कमजोर पड़ जाती है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और कलाकारों से अपील करते हुए कहा, “ऐसी फिल्में बननी चाहिए जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनें। यदि किसी डकैत को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, तो युवा पीढ़ी उसे ही अपना आदर्श मानने लगेगी। इसलिए कभी भी डकैतों का महिमामंडन न करें।”

उन्होंने यह भी जोर दिया कि समाज के विकास के लिए नैतिक मूल्यों और आदर्शों का संरक्षण बेहद जरूरी है। अगर मनोरंजन के माध्यम से गलत संदेश फैलता है, तो उसका असर समाज की मानसिकता पर भी पड़ता है।

इस बयान के बाद सांस्कृतिक और मनोरंजन जगत में बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इस विचार का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नजरिए से देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मनोरंजन और समाज के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि रचनात्मक स्वतंत्रता भी बनी रहे और समाज पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़े।

कुल मिलाकर, Yogi Adityanath का यह बयान समाज में बढ़ते सांस्कृतिक प्रभावों और युवाओं की सोच को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देता है।

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