100 mg से ज्यादा वाली निमेसुलाइड दवा बनाने–बेचने पर बैन: दवा सुरक्षा, नियमन और मरीजों के हित में बड़ा कदम

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नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 । केंद्र सरकार ने दवा सुरक्षा को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड दवाओं के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का उद्देश्य मरीजों को संभावित दुष्प्रभावों से बचाना और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नियामक संस्थाओं के लंबे आकलन के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसे पब्लिक हेल्थ के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने दर्द और बुखार में इस्तेमाल होने वाली निमेसुलाइड (Nimesulide) दवा के 100 मिलीग्राम से अधिक डोज की सभी ओरल (खाने वाली) दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है। जो दर्द तो कम करती है, लेकिन इसकी ज्यादा डोज से लिवर खराब होने का खतरा रहता है।

यह प्रतिबंध केवल अधिक डोज (100 मिलीग्राम) वाली निमेसुलाइड पर लागू होगा। जबकि कम डोज की दवाएं मिलती रहेंगी। निमेसुलाइड ब्रांड बेचने वाली दवा कंपनियों को अब ज्यादा डोज वाली दवाओं का प्रोडक्शन बंद करना होगा। जो दवाइयां पहले से बाजार में मौजूद हैं उन्हें वापस मंगाना होगा।

इस फैसले का असर फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा, खासकर उन कंपनियों पर जो उच्च डोज़ वाली निमेसुलाइड दवाएं बनाती थीं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दीर्घकाल में उद्योग के लिए भी सकारात्मक है, क्योंकि इससे दवा नियमन में पारदर्शिता बढ़ेगी और सुरक्षित दवाओं पर भरोसा मजबूत होगा। साथ ही, डॉक्टरों और मरीजों दोनों में दवा के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, 100 mg से ज्यादा वाली निमेसुलाइड दवाओं पर बैन मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला फैसला है। यह दर्शाता है कि सरकार दवा नियमन को लेकर सतर्क है और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

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