नई दिल्ली,21 अक्टूबर 202 | मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने शेयर बाजार में शुरुआत के साथ ही निवेशकों का ध्यान खींच लिया। 21 अक्टूबर 2026 को खुला यह IPO पहले दिन ही उपलब्ध शेयरों के मुकाबले मजबूत मांग के चलते चर्चा में आ गया। खास बात यह रही कि योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले तीन गुना से अधिक बोलियां मिलीं। हालांकि, खुदरा निवेशकों की ओर से शुरुआती प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही।
जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का देश का सबसे बड़ा IPO आज, 21 अक्टूबर को पहले ही दिन कुल 3.02 गुना भर गया है। बड़े निवेशकों ने 9 गुना और आम लोगों ने 0.71 गुना सब्सक्राइब किया है।
30 हजार करोड़ रुपए के इश्यू के लिए अब तक 66 हजार करोड़ रुपए की बोली लग चुकी है। एक शेयर की कीमत यानी प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 है। शेयर लेने के लिए आम निवेशक को कम से कम ₹13,428 लगाने होंगे।
मैक्सिमम 14 लॉट यानी 168 शेयर के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए ₹1.87 लाख रुपए लगेंगे। ग्रे मार्केट के हिसाब से लिस्टिंग पर 23% रिटर्न मिल सकता है।
यह IPO 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। इस IPO में कंपनी 27 करोड़ शेयर जारी कर रही है। इसके जरिए 30,188 करोड़ रुपए जुटाएगी। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैप ₹10.30 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
QIB श्रेणी में तीन गुना से ज्यादा मांग
IPO में योग्य संस्थागत खरीदारों यानी QIB की श्रेणी में सबसे अधिक दिलचस्पी देखने को मिली। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, शुरुआती आंकड़ों में इस श्रेणी को उसके लिए आरक्षित शेयरों के मुकाबले 3.25 गुना बोलियां मिली थीं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सुबह 10:44 बजे तक QIB सब्सक्रिप्शन 3.68 गुना दर्ज किया गया।
इसके मुकाबले खुदरा निवेशकों की श्रेणी में सब्सक्रिप्शन काफी कम था। सुबह के आंकड़ों में रिटेल हिस्सा करीब 0.23 से 0.26 गुना के स्तर पर रहा। इससे पता चलता है कि IPO की शुरुआती मांग में संस्थागत निवेशकों का योगदान अधिक रहा।
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO पर क्यों है सबकी नजर?
जियो प्लेटफॉर्म्स भारत के दूरसंचार और डिजिटल कारोबार में प्रमुख कंपनी है। इसके कारोबार में टेलीकॉम सेवाओं के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी के बड़े ग्राहक आधार और डिजिटल बाजार में मौजूदगी के कारण इसके शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के 500 मिलियन से अधिक ग्राहक हैं। यह IPO रिलायंस समूह की लंबे समय बाद आने वाली बड़ी सार्वजनिक पेशकश भी है। इससे घरेलू और वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
IPO का तेजी से सब्सक्राइब होना निवेशकों की मांग को दर्शाता है, लेकिन इससे लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कीमत कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, बाजार की परिस्थितियों, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।
इसलिए निवेशकों को केवल सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों या बाजार में चल रही चर्चाओं के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी की आय, मुनाफा, कर्ज, भविष्य की योजनाओं और IPO के मूल्यांकन का विश्लेषण करना जरूरी है।