भारतीय घरों में छिपा ‘सोने का खजाना’—दुनिया के टॉप-10 बैंकों से भी ज्यादा गोल्ड
नई दिल्ली, भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और निवेश का सबसे बड़ा साधन माना जाता है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय घरों में रखा सोना दुनिया के टॉप-10 केंद्रीय बैंकों के कुल गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा हो चुका है।
भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है।
भारतीयों के पास इतना सोना है कि अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग हर देश की सालाना GDP से भी ज्यादा है। एसोचैम का कहना है कि अगर इस सोने को देश के बैंकिंग सिस्टम या बिजनेस में लगाया जाए, तो भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 से 35,000 टन तक सोना मौजूद है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा निजी (private) गोल्ड स्टॉक में गिना जाता है।
वहीं, दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक—जैसे अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस और चीन—के कुल गोल्ड रिजर्व को जोड़ दिया जाए, तब भी यह भारतीय घरों में मौजूद सोने से कम पड़ता है। इस सोने की कुल कीमत का अनुमान $3.8 ट्रिलियन से लेकर $5 ट्रिलियन (लगभग भारत की GDP के बराबर या उससे ज्यादा) तक लगाया जा रहा है।
क्यों खास है भारतीयों का सोना?
- भारत में सोना पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में चलता है
- शादी, त्योहार और सामाजिक परंपराओं में इसका खास महत्व
- आर्थिक संकट में “सुरक्षा कवच” की तरह काम करता है
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भरोसेमंद निवेश
हालांकि इतना बड़ा गोल्ड स्टॉक होने के बावजूद इसका बड़ा हिस्सा घर में निष्क्रिय (idle) पड़ा रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस सोने को बैंकिंग सिस्टम में लाया जाए, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दे सकता है।
कुल मिलाकर, भारतीय घरों में रखा सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि एक ‘छुपी हुई आर्थिक ताकत’ है, जो सही उपयोग होने पर देश की ग्रोथ को नई दिशा दे सकती है।