शराबबंदी पर सियासी घमासान—₹46 करोड़ के चंदे को लेकर जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय जनता दल पर हमला
बिहार , 07 अप्रैल 2026 । बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी टकराव तेज हो गया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर ₹46 करोड़ के कथित चंदे को लेकर तीखा निशाना साधा है, जिससे राज्य की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राजद शराब कंपनियों से चंदा लेता है, इसलिए वह शराबबंदी पर सवाल उठा रहा है। जदयू के अनुसार, जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच राजद को शराब कंपनियों से करीब 46 करोड़ 64 लाख रुपये का चंदा मिला। इसी आधार पर पार्टी ने राजद की नीयत पर सवाल उठाया है। जदयू का कहना है कि ऐसे हालात में शराबबंदी के खिलाफ बयान देना राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है। पार्टी ने कहा कि बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसके बाद कई सामाजिक बदलाव देखने को मिले हैं।
JDU नेताओं का आरोप है कि शराबबंदी के मुद्दे पर नैतिकता की बात करने वाली RJD को अपने फंडिंग स्रोतों को लेकर जवाब देना चाहिए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया गया, यह जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए।
वहीं, RJD की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि JDU जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी चंदे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में शराबबंदी एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा रहा है, जिस पर अक्सर सियासी दल आमने-सामने आ जाते हैं। ऐसे में चंदे और पारदर्शिता का मुद्दा जुड़ने से विवाद और गहरा हो गया है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। दोनों दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
कुल मिलाकर, शराबबंदी और चंदे का यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां पारदर्शिता, नैतिकता और राजनीतिक रणनीति तीनों सवालों के घेरे में हैं।