ईरान की सप्लाई रोकने की चेतावनी से वैश्विक बाजार में हलचल—कच्चा तेल $110 के पार, महंगाई बढ़ने का खतरा
नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 । मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा ग्लोबल ऑयल सप्लाई रोकने की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ी उथल-पुथल मचा दी है। इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें आज फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को नर्क बनाने धमकी देने के बाद ईरान ने ग्लोबल सप्लाई ठप करने की बात कही है।
इससे आज एक बैरल ब्रेंट क्रूड की कीमत $1.71 की बढ़कर $110.74 पर पहुंच गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह तनाव इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल पहुंच सकती हैं।
इसके अलावा, अगर कच्चे तेल की कीमत में $1 की बढ़ोतरी सालभर बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब ₹16,000 करोड़ बढ़ जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान वास्तव में तेल आपूर्ति में कटौती करता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और उसकी किसी भी तरह की बाधा से सप्लाई-डिमांड संतुलन बिगड़ सकता है।
तेल की कीमतों में इस तेजी का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अधिक पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। इससे महंगाई दर में इजाफा होने की संभावना है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है। कई देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग करने की योजना बना सकते हैं।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को टालने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटा हुआ है। यदि स्थिति नियंत्रण में नहीं आती, तो आने वाले समय में तेल बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भू-राजनीतिक तनाव किस तरह वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है।