जर्मन चांसलर मर्ज बोले—यूरोप की आज़ादी की गारंटी नहीं

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नई दिल्ली, 14 फ़रवरी 2026 ।  Friedrich Merz के हालिया बयान ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में यूरोप की आज़ादी और सुरक्षा को “स्वतःसिद्ध” मानकर नहीं चला जा सकता। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब Europe में रक्षा व्यय, ऊर्जा निर्भरता और ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों पर चर्चा तेज है।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि यूरोप की आजादी की अब गारंटी नहीं है। मर्ज के मुताबिक यूरोप अब यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे अपने-आप सुरक्षा मिलती रहेगी।

म्यूनिख में सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC) को संबोधित करते हुए मर्ज ने माना कि यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में गहरी दरार आ गई है।

उन्होंने कहा कि नियमों से चलने वाली दुनिया खत्म हो गई है, वैश्विक व्यवस्था अब उस रूप में मौजूद नहीं रही। मर्ज ने कहा कि दुनिया अब बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा से चल रही है।

सम्मेलन में कई यूरोपीय नेता और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे।

  • यूक्रेन युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं।

  • अमेरिका–यूरोप रक्षा तालमेल और NATO की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

  • जर्मनी समेत कई देशों ने रक्षा बजट 2% जीडीपी के लक्ष्य के आसपास या उससे ऊपर ले जाने की योजना बनाई है।

जर्मनी की भूमिका

जर्मनी, जो यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, ने हाल के वर्षों में रक्षा आधुनिकीकरण के लिए विशेष फंड (100 अरब यूरो का पैकेज) की घोषणा की थी। मर्ज का संकेत है कि यूरोप को दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे—सिर्फ गठबंधनों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं।

संभावित असर

  1. रक्षा उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ सकता है।

  2. ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला विविधीकरण पर जोर रहेगा।

  3. यूरोपीय संघ के भीतर सामूहिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की कोशिशें तेज होंगी।

मर्ज का बयान चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है—सुरक्षा की गारंटी बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि आंतरिक तैयारी और सामूहिक इच्छाशक्ति से आती है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि यूरोप अपनी रक्षा और विदेश नीति में कितनी तेजी से ठोस बदलाव करता है।

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