रेवंत रेड्डी का तीखा हमला – “BJP के लिए ओवैसी ही इकलौते भगवान”
हैदराबाद, 10 फ़रवरी 2026 । तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “BJP के लिए ओवैसी ही इकलौते भगवान हैं,” जिससे राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी का नया दौर शुरू हो गया है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा भगवान राम का नाम तो लेती है, लेकिन असल में उनके लिए सबसे बड़ा सहारा और इकलौता भगवान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैं।
रेवंत रेड्डी ने सोमवार को हैदराबाद में प्रेस कॉंफ्रेस कर कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए बार-बार ओवैसी को मुद्दा बनाती है। अगर भाजपा के राजनीतिक इतिहास और बयानों का विश्लेषण करें, तो उनके लिए सिर्फ एक ही भगवान असदुद्दीन ओवैसी हैं।
रेवंत रेड्डी बोले- AIMIM भी लोकतांत्रिक पार्टी है
रेवंत रेड्डी ने कहा कि लोकतंत्र में AIMIM भी एक राजनीतिक दल है। वह चुनाव लड़ती है और जहां जनसमर्थन मिलता है, वहां जीतती है।
उन्होंने कहा कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में AIMIM ने चुनाव लड़े और पश्चिम बंगाल में पांच सीटें भी जीतीं। ऐसे में उन्हें भूत-प्रेत या राक्षस बताकर वोट मांगना वैचारिक गरीबी है।
रेवंत रेड्डी ने अंत में तेलंगाना की जनता से सवाल करते हुए कहा कि सिर्फ धार्मिक नफरत भड़काकर, कुछ नेताओं को राक्षस बताकर राजनीति में जिंदा रहना वैचारिक गरीबी है। इस वैचारिक गरीबी को देखकर तेलंगाना की जनता को तय करना चाहिए कि भाजपा को वोट देना है या नहीं।
BJP बोली- रेवंत रेड्डी के लिए भाजपा ही भगवान
तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने कहा कि असल में रेवंत रेड्डी के लिए BJP ही भगवान बन चुकी है, क्योंकि वे हर राजनीतिक बयान में BJP का नाम लेते हैं। रेवंत रेड्डी BJP का नाम लेकर मुस्लिम समुदाय को डराने की कोशिश करते हैं।
एन रामचंदर राव ने कहा कि कांग्रेस और AIMIM की राजनीतिक नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। रेवंत रेड्डी और ओवैसी करीबी हैं और राजनीति में कांग्रेस व AIMIM साथ-साथ चलती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना की राजनीति में कांग्रेस, BJP और AIMIM के बीच त्रिकोणीय मुकाबला कई सीटों पर देखने को मिलता है। हैदराबाद और उसके आसपास के इलाकों में AIMIM का प्रभाव मजबूत है, जबकि BJP हाल के वर्षों में अपने वोट शेयर में बढ़ोतरी का दावा करती रही है। ऐसे में बयानबाज़ी का सीधा असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।