नई दिल्ली, 06 फ़रवरी 2026 । फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होने वाली इस फिल्म का टीज़र जारी होने के बाद सोशल मीडिया और कुछ सामाजिक समूहों ने इसे जाति-विशेष को अपमानित करने वाला बताया, खासकर “पंडत” शब्द के साथ “घूसखोर” जोड़ने को लेकर आरोप लगे कि यह ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रहा है। विवाद बढ़ने के चलते FIR भी दर्ज कराई गई है और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज ने आपत्ति जताई है। वहीं, बढ़ते विरोध के बीच शुक्रवार को फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी कर फिल्म को पूरी तरह काल्पनिक बताया है।
साथ ही फिल्म का टीजर और उससे जुड़ा सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब से हटा दिया गया। इस पर फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी किया है और विवाद को लेकर खुलकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक फिक्शनल पुलिस ड्रामा है और “पंडत” शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के नाम के रूप में किया गया है, न कि किसी समुदाय, जाति या धर्म को निशाना बनाने के लिए। उनका कहना है कि कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के कार्यों और विकल्पों पर केंद्रित है, न कि किसी सामाजिक समूह पर। नीरज पांडे ने आगे बताया कि वे एक जिम्मेदार फिल्ममेकर हैं और किसी भी दर्शक की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं रखते। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म के शीर्षक को लेकर कुछ लोगों को आहत महसूस हुआ है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। विवाद के बीच उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए यह निर्णय भी सुनाया है कि फिल्म के सभी प्रचार सामग्री को फिलहाल हटा दिया जाएगा, ताकि दर्शक फिल्म को उसके संपूर्ण संदर्भ और कथा के साथ समझ सकें, न कि केवल टीज़र या कुछ अंशों के आधार पर। यह निर्णय विवाद को शांत करने और बेहतर समझ प्रदान करने की कोशिश माना जा रहा है।
नीरज पांडे ने इसके अलावा कहा कि फिल्म को पूरी तरह से रिलीज़ कर दर्शकों के सामने लाने की उम्मीद है, ताकि कहानी को गलत समझ या पूर्वधारणाओं से ऊपर उठकर देखा जाए।