तेहरान , 03 फ़रवरी 2026 । ईरान में पिछले महीनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों द्वारा लगाए गए दमन के तरीकों को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और यौन हिंसा के आरोप भी शामिल हैं। ये आरोप अंतरराष्ट्रीय मीडिया, मानवाधिकार संगठनों और प्रत्यक्षदर्शी बयानों के माध्यम से उठे हैं और विवाद का विषय बने हुए हैं। सबसे चौकाने वाला दावा यह है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने महिलाओं के साथ यौन हिंसा का इस्तेमाल विरोध और डर फैलाने के तौर पर किया, जिससे विरोध प्रदर्शनों को दबाने में मदद मिले। ईरानी‑जर्मन पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही और प्रत्यक्षदर्शियों का कथन है कि गिरफ्तार महिलाओं के साथ बलात्कार की धमकियों, जबर्दस्ती निर्वस्त्र करने और यौन हिंसा के अन्य रूपों जैसा व्यवहार किया गया।
ईरानी-जर्मन पत्रकार मिशेल अब्दोल्लाही ने ईरानी सरकार पर चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सुरक्षा बलों ने विरोध करने वाली महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और म्यूटिलेशन (विकलांग करना) को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह लोगों में ज्यादा से ज्यादा डर पैदा कर सके और संघर्ष रुक जाए।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दोल्लाही ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि उन्हें प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी मिली है। उनके अनुसार, गिरफ्तार महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है, उनके गर्भाशय निकाल दिए जाते हैं, सिर की खाल उनके बालों सहित उतार दी जाती है और शरीर पर सिगरेट के जलने के निशान छोड़ दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के शव बहुत कम या बिल्कुल नहीं लौटाए जाते क्योंकि शासन उन्हें पहले जला देता है ताकि यातना के निशान छिप जाएं। अब्दोल्लाही ने आरोप लगाया कि ईरान का इस्लामिक गणराज्य, खामेनेई के नेतृत्व में अपने लोगों के खिलाफ बलात्कार को हथियार बनाता है। यहां तक कि बच्चों के साथ भी ऐसी ही हिंसा की जा रही है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि महिलाएं सेक्सुअल असॉल्ट, गैंग रेप और अन्य यौन उत्पीड़न के शिकार हुईं, और ऐसे कई मामले हैं जिनमें पुरुष विरोधियों और नाबालिगों तक को इसी तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा। यह जानकारी 45 से अधिक पीड़ितों के साक्षात्कारों पर आधारित रिपोर्टों में सामने आई, जिसमें गैंग रेप, यौन दुरुपयोग और अन्य अत्याचार जैसी घटनाओं पर प्रकाश डाला गया है। इन दावों के साथ यह भी सामने आया है कि अधिकांश मामलों में स्थानीय अधिकारियों ने शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, और पीड़ितों के आरोपों को अज्ञात परिणामों के साथ छोड़ दिया गया, जिससे न्याय पाने की संभावना कम हो गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में गवाहों और पीड़ितों ने प्रतिशोध के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराई। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यह यौन हिंसा बस isolated घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि व्यापक सुरक्षा बलों के उत्पीड़न के पैटर्न का हिस्सा हैं, जिसमें महिलाओं और बच्चों तक को निशाना बनाया गया। हालांकि ईरानी सरकार इन आरोपों की पुष्टि नहीं करती और कई बार इन्हें खंडित भी करती रही है।