समुद्री इतिहास की पुनर्जीवित यात्रा: इंडियन नेवी का जहाज ‘कौंडिन्य’ भारत से ओमान पहुंचा
नई दिल्ली, 14 जनवरी 2026 । भारतीय नौसेना के जहाज ‘कौंडिन्य’ ने भारत से ओमान तक की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह यात्रा सिर्फ एक नौसैनिक मिशन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन समुद्री विरासत, व्यापारिक परंपराओं और सांस्कृतिक संपर्कों को पुनर्जीवित करने का प्रतीक मानी जा रही है। ‘कौंडिन्य’ का ओमान पहुंचना भारत और पश्चिम एशिया के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंधों की याद दिलाता है।
इंडियन नेवी का 2000 साल पुरानी पाल विधि से निर्मित जहाज INSV कौंडिन्य बुधवार को 18 दिनों की यात्रा पूरी कर गुजरात से ओमान पहुंच गया। कौंडिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से यात्रा शुरू की थी और 14 जनवरी को ओमान के मस्कट पहुंचा।
इस यात्रा का मकसद भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को फिर से पुनर्जीवित करना है। यह जहाज 4थी-5वीं शताब्दी के भारतीय जहाजों के मॉडल पर बना है। बिना कील या धातु के लकड़ी के तख्तों को रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया।
इस पर कोई कमरा नहीं है। क्रू मेंबर्स स्लीपिंग बैग में सोते थे। वहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए क्रू के पास सिर्फ हेडलैंप्स थे, जो अपने सिर पर लगाकर रखते थे। क्रू मेंबर्स ने 18 दिन खिचड़ी और अचार खाकर बिताए।
जहाज ‘कौंडिन्य’ को पारंपरिक डिजाइन और प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीक से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि भारत हजारों साल पहले भी समुद्री व्यापार और नौवहन में कितना उन्नत था। भारत से ओमान तक की यह यात्रा उसी ऐतिहासिक समुद्री मार्ग पर की गई, जिसका उपयोग प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी मसाले, वस्त्र और अन्य सामान के व्यापार के लिए करते थे।
इस अभियान में भारतीय नौसेना के अधिकारियों और नाविकों ने चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों का सामना करते हुए यह साबित किया कि पारंपरिक तकनीक और आधुनिक नौसैनिक कौशल का संयोजन आज भी सफल हो सकता है। ओमान पहुंचने पर जहाज का भव्य स्वागत किया गया, जो भारत–ओमान के मजबूत ऐतिहासिक और कूटनीतिक रिश्तों को भी दर्शाता है।
‘कौंडिन्य’ की यह यात्रा भारत की समुद्री शक्ति (Maritime Power) और सांस्कृतिक कूटनीति का एक सशक्त उदाहरण है। इससे न केवल युवा पीढ़ी को भारत के गौरवशाली समुद्री इतिहास के बारे में जानने का अवसर मिलता है, बल्कि यह संदेश भी जाता है कि भारत वैश्विक समुद्री मंच पर अपनी विरासत और क्षमता दोनों के साथ मजबूती से खड़ा है।
भारतीय नौसेना का यह प्रयास आने वाले समय में अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समुद्री अभियानों का रास्ता भी खोल सकता है। ‘कौंडिन्य’ की भारत से ओमान तक की सफल यात्रा एक बार फिर यह साबित करती है कि समुद्र सदियों से भारत को दुनिया से जोड़ते आए हैं।