काराकस, 03 जनवरी 2026 । अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई, जब कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया दावों में कहा गया कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां के राष्ट्रपति को पकड़ लिया गया। हालांकि इस तरह की खबरों को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इन दावों ने वैश्विक स्तर पर चिंता और अटकलों का दौर जरूर शुरू कर दिया है।
अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला अब अमेरिकी सैनिकों के कब्जे में हैं। उन्हें न्यूयॉर्क लाया जा रहा है।
CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि मादुरो और उनकी पत्नी को सेना ने बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाला और अपने कब्जे में लिया। ट्रम्प इस मौके का लाइव ऑपरेशन देख रहे थे।
अमेरिका ने बीती रात करीब 2 बजे (भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह 11:30 बजे) वेनेजुएला के 4 शहरों पर हमले किए थे।
इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने मिलिट्री ठिकानों और खास जगहों को निशाना बनाया। ट्रम्प ने कहा कि वे सुबह 11 बजे (भारतीय समय के मुताबिक रात 9:30 बजे) प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले पर पूरी जानकारी देंगे।
वहीं दूसरी ओर, कई विश्लेषकों और जानकारों ने इन खबरों को अफवाह या भ्रामक सूचना करार दिया है। उनका कहना है कि किसी भी देश के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी या सैन्य कार्रवाई जैसे बड़े घटनाक्रम पर आमतौर पर तुरंत आधिकारिक बयान, संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया और वैश्विक मीडिया की स्पष्ट पुष्टि सामने आती है, जो फिलहाल नजर नहीं आ रही है। ऐसे में इन दावों को सावधानी से देखने की जरूरत है।
वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना कर रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है। ऐसे माहौल में किसी भी तरह की अपुष्ट खबरें स्थिति को और भड़का सकती हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति और तथ्यों पर आधारित सूचना की अपील कर रहा है।
अमेरिका की ओर से भी अब तक किसी हमले या राष्ट्रपति की गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस तरह की खबरें अक्सर गलत सूचना अभियानों का हिस्सा होती हैं, जिनका मकसद भ्रम और डर का माहौल बनाना होता है। आने वाले समय में यह साफ हो पाएगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है और वास्तविक स्थिति क्या है।
फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका–वेनेजुएला संबंधों को लेकर वैश्विक नजरें टिकी हुई हैं। किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।