पाकिस्तान ने संघर्ष रुकवाने का श्रेय चीन को दिया, कूटनीतिक भूमिका पर जोर

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बीजिंग/इस्लामाबाद, 03 जनवरी 2026 । क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान ने संघर्ष को थामने में चीन की भूमिका की सराहना करते हुए उसे इसका क्रेडिट दिया है। पाकिस्तानी नेतृत्व का कहना है कि हालिया हालात में चीन की सक्रिय कूटनीति, संवाद पर जोर और संतुलित रुख ने तनाव कम करने में अहम योगदान दिया। इस बयान के बाद दक्षिण एशिया और व्यापक क्षेत्रीय राजनीति में चीन की मध्यस्थ भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

पाकिस्तान ने चीन के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मध्यस्थता के दावे का समर्थन किया है। चीन के दावे से जुड़े सवाल के जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीनी नेता उन दिनों पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में थे। चीन के नेताओं ने भारतीय नेतृत्व से भी कुछ बातचीत की थी।

चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। ऐसे में पाकिस्तान का यह बयान दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती को भी दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का चीन को सार्वजनिक रूप से श्रेय देना यह संकेत देता है कि बीजिंग अब सिर्फ आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संकटों में प्रभावी कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में भी उभर रहा है।

इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे चीन की “शांति-स्थापना” कूटनीति का उदाहरण मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान के बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों में चीन की भूमिका कितनी निर्णायक होगी।

पाकिस्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्ष विराम सभी पक्षों के हित में है और क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद ही एकमात्र रास्ता है। चीन की भूमिका को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि बाहरी ताकतों को तनाव बढ़ाने के बजाय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान द्वारा संघर्ष रुकवाने का श्रेय चीन को देना क्षेत्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, जो आने वाले समय में एशिया की राजनीतिक दिशा और शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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