सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की चेतावनी: सख्ती, जवाबदेही और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका
नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2025 । केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर बढ़ते अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए प्लेटफॉर्म्स और यूज़र्स दोनों को स्पष्ट चेतावनी दी है। सरकार का कहना है कि डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है, और कानून का उल्लंघन करने वाले कंटेंट पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी का उद्देश्य बच्चों, किशोरों और समाज के कमजोर वर्गों को हानिकारक सामग्री से बचाना है।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अश्लील कंटेंट को लेकर चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया है कि कंपनियां अश्लील, भद्दे, पोर्नोग्राफिक, बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले और गैर-कानूनी कंटेंट पर तुरंत रोक लगाएं। यदि कंपनियां ऐक्शन नहीं लेंगी तो उन पर केस चलेगा।
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी (Meity) ने ये एडवाइजरी सोमवार को जारी की थी। PTI न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को रिपोर्ट जारी कर बताया कि एडवाइजरी में इंटरनेट प्लेटफॉर्म को IT एक्ट के संबंध में अपने कंप्लायंस फ्रेमवर्क की समीक्षा करने के लिए कहा गया है।
केंद्र की चेतावनी में यह भी कहा गया है कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स, पेजेस और चैनलों पर ब्लॉकिंग, फाइन और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। खास तौर पर नाबालिगों से जुड़ी अश्लील सामग्री, डीपफेक, बिना सहमति साझा किए गए निजी वीडियो और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट को “जीरो टॉलरेंस” श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने प्लेटफॉर्म्स से मजबूत कंटेंट मॉडरेशन, आयु-आधारित नियंत्रण और शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाने को कहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चेतावनी डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, इसके साथ ही यूज़र्स की जागरूकता भी जरूरी है। कंटेंट बनाने और साझा करने से पहले कानून, मर्यादा और सामाजिक प्रभावों को समझना आवश्यक है। अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है, ताकि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।
कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की चेतावनी यह संकेत देती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अनुशासन और जवाबदेही का दौर और सख्त होने जा रहा है। सरकार का जोर स्पष्ट है— सुरक्षित, सम्मानजनक और कानूनसम्मत डिजिटल माहौल, जहां तकनीक का उपयोग समाज के हित में हो।