महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव की सरगर्मी तेज, महायुति आज सीटों के बंटवारे का ऐलान संभव

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मुंबई, 26 दिसंबर 2025 । महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। सत्तारूढ़ महायुति—जिसमें भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) शामिल हैं—आज सीटों के बंटवारे का औपचारिक ऐलान कर सकती है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद गठबंधन के भीतर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, प्रमुख महानगरों और बड़े नगर निगमों में सीटों के वितरण को लेकर गहन मंथन हुआ है। भाजपा शहरी इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ के आधार पर अधिक सीटों की दावेदारी कर रही है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में संतुलन चाहती है। वहीं एनसीपी (अजित पवार गुट) कुछ चुनिंदा नगर निगमों और वार्डों में निर्णायक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की कोशिश में है।

महाराष्ट्र मे नगर निगम चुनाव की घोषणा के बाद से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीजेपी, एनसीपी (अजित), शिवसेना (शिंदे) वाले गठबंधन महायुति ने सभी 227 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। बीजेपी विधायक अमित साटम ने कहा- महायुति सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, अभी 200 सीटों पर सहमति बन गई है।

AIMIM ने 13 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इनमें मुंबई, अहमदनगर, लातुर और परभनी सीट भी शामिल हैं। मुस्लिम मेयर बनाए जाने के सवाल पर AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा- संविधान समानता की बात करता है मराठी ही क्यों खान, पठान, अंसारी या शेख क्यों नहीं मेयर बन सकते? ने वाले समय में बुर्का वाली या मुस्लिम नाम वाले भी मेयर पद संभाल सकते हैं।

पठान के बयान पर मुंबई बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि मुंबई की आबादी बदलने की साजिश रुकेगी, मुस्लिम मेयर कभी नहीं बनने देंगे। ​शिंदे गुट के संजय निरुपम ने कहा कि खान-पठान से बैर नहीं, लेकिन मेयर मराठी भाषी लोग तय करेंगे।

नगर निगम चुनाव में AAP ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी भिवंडी, नवी मुंबई और ठाणे में उम्मीदवार उतारेगी। महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के लिए शेड्यूल जारी किया है। इनमें मतदान 15 जनवरी को होंगे और 16 जनवरी को रिजल्ट घोषित किया जाएगा। ​​​​​​

महायुति के लिए यह चुनाव सिर्फ स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा। यही कारण है कि सीटों के बंटवारे में सामाजिक समीकरण, स्थानीय नेताओं की पकड़ और पिछले चुनावों के आंकड़ों को खास महत्व दिया जा रहा है।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों की रणनीति भी इस ऐलान पर टिकी हुई है। महाविकास अघाड़ी इस बात पर नजर बनाए हुए है कि महायुति किन इलाकों में किस दल को आगे कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सीटों का बंटवारा संतुलित और विवादमुक्त रहता है, तो महायुति को शहरी मतदाताओं के बीच स्पष्ट संदेश देने में मदद मिलेगी।

फिलहाल सभी की निगाहें आज होने वाली संभावित घोषणा पर टिकी हैं। अगर महायुति सीटों के ऐलान में सफल रहती है, तो चुनाव प्रचार को नई रफ्तार मिलेगी। वहीं किसी तरह की असहमति या देरी होने पर गठबंधन के भीतर खींचतान की चर्चा भी तेज हो सकती है। आने वाले घंटे महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

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