प्रधानमंत्री बोले – सरदार पटेल चाहते थे पूरा कश्मीर हमारा हो: राष्ट्रीय एकता दिवस पर ऐतिहासिक संदर्भों की याद

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 25 । राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल चाहते थे कि पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा बने”, लेकिन उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और कुछ गलत फैसलों के कारण यह संभव नहीं हो सका। प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल ऐतिहासिक संदर्भों को उजागर करता है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर भी एक गहरा संकेत देता है।

PM मोदी शुक्रवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर गुजरात पहुंचे। उन्होंने नर्मदा जिले के एकता नगर में सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा (स्टेच्यू ऑफ यूनिटी) पर पुष्पांजलि अर्पित की। एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड का आयोजन हुआ।

पीएम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- सरदार पटेल पूरे कश्मीर को भारत में मिलाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया। कश्मीर को अलग संविधान से बांट दिया। कांग्रेस की गलती की आग में देश दशकों तक जलता रहा।

PM ने कहा- कांग्रेस को न केवल अपनी पार्टी और सत्ता, बल्कि गुलाम मानसिकता अंग्रेजों से विरासत में मिली है। जब अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, तो वंदे मातरम् राष्ट्र की एकता और एकजुटता की आवाज बना। अंग्रेजों ने वंदे मातरम् पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, लेकिन कभी सफल नहीं हुए।

मोदी ने कहा- जो काम अंग्रेज नहीं कर पाए, वह कांग्रेस ने कर दिया। कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर वंदे मातरम् के एक हिस्से को हटा दिया। इसका मतलब है कि कांग्रेस ने समाज को विभाजित किया और ब्रिटिश एजेंडे को आगे बढ़ाया।

PM ने राष्ट्रीय एकता दिवस परेड की सलामी ली PM ने संबोधन से पहले राष्ट्रीय एकता दिवस परेड की सलामी ली। परेड में शामिल सभी टुकड़ियों का नेतृत्व महिला अफसरों ने किया। परेड में BSF, CISF, ITBP, CRPF, और सीमा सुरक्षा बल समेत 16 टुकड़ियों ने हिस्सा लिया।

परेड में ऑपरेशन सिंदूर में BSF के 16 पदक विजेता और CRPF के 5 शौर्य चक्र विजेता भी शामिल हुए। परेड का नेतृत्व हेराल्डिंग टीम के 100 सदस्यों ने किया, जबकि 9 बैंड टुकड़ियां और 4 स्कूल बैंड ने परेड में परफॉर्म किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान आगामी चुनावी सत्र से पहले एक ऐतिहासिक और वैचारिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रवाद के मुद्दे को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश है।

सरदार पटेल, जिन्हें “आयरन मैन ऑफ इंडिया” कहा जाता है, ने आज़ादी के बाद देश की अधिकांश रियासतों को भारत में विलय कराने में अहम भूमिका निभाई थी। कश्मीर को लेकर उनका दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट था — “भारत एक है और रहेगा।”

प्रधानमंत्री के इस बयान ने एक बार फिर देशभर में इतिहास, एकता और कश्मीर पर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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