रिटायरमेंट के बाद बोले जस्टिस कुरियन, कानून के जानकारों की चुप्पी ज्यादा नुकसानदायक

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने रिटायरमेंट के बाद कानून के जानकारों की चुप्पी पर बड़ा बयान दिया है। जस्टिस कुरियन ने कहा कि एक कानून का जानकार जब चुप्पी साध लेता है तो वह एक अपराधी से भी ज्यादा समाज को नुकसान पहुंचाता है। जस्टिस ने कहा कि कोर्ट के भीतर सही रवैये के साथ अपने काम को जुनून के साथ करना जबरदस्त अनुभव है, मैं गर्व के साथ सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने अपना काम सबसे अच्छा किया है। आपको बता दें कि जस्टिस कुरियन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से सेवानिवृत्त हो गए, उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत केरल हाई कोर्ट में बतौर वकील की थी।

केरल हाई कोर्ट में चार साल तक वकालत करने के बाद जस्टिस कुरियन 2000 मे बेंच का हिस्सा बने, जिसके बाद वह दो बार कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस रह चुके हैं। इसके बाद वह हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। जिसके साढ़े पांच साल बाद जस्टिस कुरियन सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस कुरियन रोमन कैथोलिक परिवार से आते हैं, उनका जन्म एर्नाकुलम के कलेडी तन्नीपुझा में हुआ था। उनके पिता केरल हाई कोर्ट में क्लर्क थे। जस्टिस कुरियन के पिता अपने अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, वह कहते थे कि आपका अनुशासन आपका भविष्य तय करता है।

जस्टिस कुरियन ने कहा कि हर केस जो मेरे सामने आया उसे मैंने गरीब और पिछड़ों को ध्यान में रखते हुए देखा। मेरा मुख्य लक्ष्य था कानून से इतर लोगों को इंसाफ देना। तीन तलाक मुद्दे पर बनी नेशनल ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी कमीशन का भी हिस्सा थे। जस्टिस जोसेफ कुरियन ने अपने कार्यकाल में किसी को भी फांसी की सजा नहीं सुनाई, वह फांसी की सजा दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। यहां गौर करने वाली बात है कि याकूब मेमन की फांसी पर आधी रात को सुनवाई के दौरान जस्टिस कुरियन उसका हिस्सा थे। लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि यह सुनवाई फांसी दी जाए या नहीं इसके लिए नहीं थी बल्कि क्या इस मामले की फिर से समीक्षा की जानी चाहिए या नहीं इस बात को लेकर थी।

जस्टिस कुरियन उन चार जजों में भी शामिल थे, जिन्होंने देश के इतिहास में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस पर जस्टिस कुरियन कहते हैं कि मैंने सही काम किया था, यह समय की जरूरत थी और मेरी जिम्मेदारी भी। जो लोग इसके पीछे की पृष्ठभूमि को नहीं जानते हैं, उन्हें बताना चाहता हूं कि यह कोई भावना में बहकरक लिया गया फैसला नहीं था, हमने यह इसलिए किया ताकि हमारी बात को सुना जाए क्योंकि इसके लिए बाकी के रास्ते बंद हो चुके थे।

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