NCLAT ने साइरस मिस्त्री को टाटा समूह का फिर कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया

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NCLAT ने टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नटराजन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध करार दिया है.

NCLAT(The National Company Law Appellate Tribunal) ने टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नटराजन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध करार दिया है. बुधवार को NCLAT ने साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में फिर से बहाल करने का आदेश दिया है. गौरतलब है कि वर्ष 2016 में साइरस मिस्त्री को हटा कर नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा समूह का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. टाटा संस ने चेयरमैन साइरस मिस्त्री पर गोपनीयता नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनसे सभी वर्गीकृत दस्तावेज लौटाने को कहा था. जिसके बाद साइरस मिस्त्री को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा था.

बता दें किृ मिस्त्री ने 24 अक्टूबर 2016 को अपने पद से त्यागपत्र देने के बाद ही टाटा संस के साथ अपनी इस लड़ाई को ‘बड़े मंच’ पर ले जाने का संकल्प जताया था. मिस्त्री को 24 अक्टूबर 2016 को अचानक ही टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था, टाटा संस टाटा समूह की सभी कंपनियों की धारक कंपनी है. हालांकि मिस्त्री ने दो पन्ने के अपने बयान और रिकार्ड वीडियो संदेश में कहा था कि प्रभावी सुधार और टाटा समूह के कर्मचारियों, शेयरधारकों तथा अन्य भागीदारों के बेहतर हितों के उद्देश्य को ‘असाधारण आम बैठकों के मंच से हटकर’ दूसरे मंच से बेहतर ढंग से हासिल किया जा सकता है. 

NCLAT के फैसले के बाद साइरस मिस्त्री के विरोधियों को जोरदार झटका लगा है. बता दें कि इससे पहले 2018 में NCLT ने साइरस मिस्त्री के याचिका को खारिज कर दिया था. कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटने के बाद  मिस्त्री ने रतन टाटा और टाटा समूह पर गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद रतन टाटा को भी इस मुद्दे पर बयान देना पड़ा था.

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