सेबी-सहारा मामला : न्यायालय ने सुब्रत राय को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी.

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नई दिल्ली, । उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय और दो अन्य
निदेशकों को निवेशकों को धन लौटाने के लिये सेबी-सहारा खाते में 25,700 करोड़ रूपए जमा कराने में कथित
रूप से विफल रहने से संबंधित मामले में अगले आदेश तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने से शुक्रवार को छूट दे दी।
प्रधान न्यााधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने राय की ओर से वरिष्ठ
अधिवक्ता विकास सिंह के कथन का संज्ञान लिया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान कर दी।
सुब्रत राय और दो अन्य निदेशक शुक्रवार को न्यायालय में मौजूद थे। पीठ ने अपने आदेश में कहा,
‘‘अवमाननाकर्ता (राय और अन्य) को अगले आदेश तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी जाती है।’’ पीठ ने
इस मामले में अधिवक्ताओं से कहा कि वे लंबित याचिकाओं का चार्ट तैयार करें और वह एक पूरे दिन इस पर
सुनवाई करेगी। इस बीच, सिंह ने न्यायालय से अनुरोध किया कि सुब्रत राय को उपलबध करायी गयी दिल्ली
पुलिस की सुरक्षा अब वापस ले ली जाये क्योंकि इसकी जरूरत नहीं है। दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त
सालिसीटर जनरल संजय जैन ने आरोप लगाया कि राय अपने निजी सुरक्षाकर्मियों का इस्तेमाल करते हैं और
न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद अधिकांश समय पुलिसकर्मियों को अपने साथ रहने की इजाजत नहीं देते हैं।
सेबी ने भी सुरक्षाकर्मी वापस लेने के सुब्रत राय के अनुरोध का विरोध किया और कहा कि न्यायालय में उनकी
उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये उनके ही खर्च पर इन सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। पीठ ने कहा कि
वह इस संबंध में कोई आदेश नहीं देगी। साथ ही उसने वकीलों को आश्वासन दिया कि यह मामला शीघ्र ही सुनवाई

के लिये सूचीबद्ध किया जायेगा। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 31 जनवरी को सुब्रत राय और दो अन्य निदेशकों
रवि शंकर दुबे और अशोक राय चौधरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था ताकि न्यायालय
उचित आदेश पारित कर सके जिससे कानून अपने हिसाब से कार्यवाही करके किसी निष्कर्ष पर पहुंच सके।
न्यायालय ने कहा था कि निवेशकों की रकम लौटाने के बारे में सहारा समूह के प्रयासों से भरोसा पैदा नहीं होता
क्योंकि 25,700 करोड़ रूपए जमा कराने के उसके आदेश पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। शीर्ष अदालत ने चार
मार्च, 2014 को सुब्रत राय को तिहाड़ जेल भेज दिया था। दो साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद
उन्हें अपनी मां छवि राय के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिये छह मई, 2016 को पेरोल पर रिहा किया
गया था। इसके बाद से ही वह जेल से बाहर हैं।

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