समीक्षा में विनिर्माण, कारोबार सुगमता बढ़ाने पर जोर, अगले साल वृद्धि 6- 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान.

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नई दिल्ली । संसद में शुक्रवार को पेश आर्थिक समीक्षा के संकेतों पर यदि गौर किया जाये
तो 2020-21 के आम बजट में देश को पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में नया कारोबार
शुरू करने, संपत्ति का पंजीकरण और करों के भुगतान के लिये व्यवस्थाओं को आसान और बेहतर बनाने की नई
घोषणायें हो सकती है। आर्थिक वृद्धि में तेजी को प्राथमिकता देते हुए चालू वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे का बजट
अनुमान से कुछ ऊपर भी जाने दिया जा सकता है ताकि पूंजी खर्च बढ़ाया जा सके। पिछले बजट में राजकोषीय
घाटा जीडीपी के 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019-
20 की आर्थिक समीक्षा लोक सभा में पेश की। इसकी प्रति दोनों सदनों के पटल पर रखी गयी। समीक्षा में अगले
वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर 6 से 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसमें कहा गया है कि
आर्थिक वृद्धि में तेजी को प्राथमिकता देने के लिये राजकोषीय घाटे के लक्ष्य कुछ ढील दी जा सकती है। इसका
सीधा अर्थ है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए बजट घाटे को लक्ष्य से कुछ ऊपर जाने दे
सकती है। समीक्षा में खाद्य सब्सिडी कम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के
दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। केन्द्रीय
सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने भी यही अनुमान व्यक्त किया है। यह दर पिछले 11 साल की सबसे कम वृद्धि
दर होगी। इससे पहले वित्त वर्ष की पहले तिमाही में वृद्धि दर पांच प्रतिशत, जबकि दूसरी तिमाही में 4.5 प्रतिशत
रही है। समीक्षा में कहा गया है कि देश इस समय 2008- 09 के बाद सबसे गहरी आर्थिक सुस्ती का सामना कर
रहा है। रोजगार की संभावनाओं पर भी इसका असर देखा जा रहा है। इस स्थिति के मद्देनजर उद्योगपतियों और
व्यवसायियों को सम्मान मिलना चाहिये। निवेश करने वाले कारोबारी संपत्ति का सृजन करने के साथ ही रोजगार
पैदा करते हैं। विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये ‘दुनिया के लिये भारत में एसेंबल करो’ का नया मंत्र समीक्षा
में दिया गया है। इसके साथ ही ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं में 1,400 अरब डालर का निवेश तेज करने की
जरूरत को रेखांकित किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत बढ़ती सब्सिडी की तरफ सरकार का
ध्यान खींचा गया है। इसमें कहा गया है कि बढ़ती खाद्य सब्सिडी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय जब
कर राजस्व प्राप्ति कम हो रही है सरकार को सब्सिडी पर अंकुश लगाना चाहिये। खाद्य सब्सिडी को नियंत्रित करने
के लिये राशन में बिकने वाले अनाज के दाम की समीक्षा होनी चाहिये। इसके साथ ही मुनाफा और दक्षता बढ़ाने के
लिये विनिवेश कार्यक्रम में तेजी लाने, बाजार में सरकारी हस्तक्षेप कम से कम रखने, उद्यमियों को प्रोत्साहन देने
और संपत्ति सृजन को समर्थन देने पर जोर दिया गया है। भारत को 2025 तक पांच हजार अरब डालर की
अर्थव्यवस्था बनाने के लिये समीक्षा में अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ाने, बाजारों को मजबूत और सशक्त बनाने,
कारोबार अनुकूल नीतियां लाने और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया गया है। नया कारोबार शुरू
करने के नियमों को आसान बनाने, संपत्ति का पंजीकरण, करों का भुगतान और अनुबंधों के क्रियान्वयन को सरल
बनाने की जरूरत भी बताई गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक समीक्षा पर जारी अपने ट्वीट में कहा कि
समीक्षा में संपत्ति सृजन पर ध्यान दिया गया है। ‘‘समीक्षा में पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था को हासिल

करने के लिये बहुआयामी रणनीति अपनाने का खाका खींचा गया है। उद्यम, निर्यात, कारोबार सुगमता और कई
अन्य सुझाव इसमें दिये गये हैं।’’ हालांकि, कुछ आर्थिक विशेषज्ञों ने समीक्षा में अगले साल के वृद्धि अनुमान को
उम्मीद से ज्यादा आशाजनक बताया है। उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार की गति इतनी तेज नहीं रह
सकती है। बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर निवेश के चलते यह हल्की रह सकती है। वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक
सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम की टीम ने आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार किया है। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती मुख्य
आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के इस विश्लेषण को भी खारिज कर दिया कि 2011 के बाद से भारतीय
अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को 2.7 प्रतिशत ऊंचा आंका जा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इस तरह
के आरोप ‘निराधार’ पाये गये हैं।

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