करदाताओं को राहत, स्लैब में किया बदलाव.

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नई दिल्ली, । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को करदाताओं को राहत देते हुए कर
कानूनों को सरल बनाने के लिए नई वैकल्पिक व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था पेश की। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत
कई त रह की छूट और कटौतियां नहीं मिलेगी। नए ढांचे में विभिन्न आयवर्ग के करदाताओं के लिए दरों में कटौती
की गई है और कुछ नए स्लैब बनाये हैं। नए वैकल्पिक कर ढांचे में 30 प्रतिशत की उच्चतम दर 15 लाख रुपये
से अधिक की आय पर लागू होती है जबकि पहले से चल रहे ढांचे में 10 लाख रुपये से अधिक की आय 30
प्रतिशत की कर दर के तहत आती है। अनुमान है कि नई कर दरों से सरकारी खजाने को सालाना 40 हजार करोड़
रुपये के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि नई कर
व्यवस्था वैकल्पिक होगी। करदाताओं को विकल्प दिया जाएगा कि वह चाहे तो छूट और कटौती के साथ पुरानी कर
व्यवस्था में रहें या फिर बिना छूट वाले नए कर ढांचे को अपनाएं। इसके तहत, 2.5 लाख रुपये तक की आय कर
मुक्त रहेगी। 2.5 से पांच लाख तक की आय पर पांच प्रतिशत की दर से कर लगेगा, लेकिन 12,500 रुपये की
राहत बने रहने से इस सीमा तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा। पांच से साढ़े सात लाख रुपये तक की आय
पर 10 प्रतिशत, साढ़े सात से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत, 10-12.5 लाख रुपये तक की
आय पर 20 प्रतिशत और 12.5 से 15 लाख रुपये तक की आय पर 25 प्रतिशत की दर से आयकर का प्रस्ताव
है। पंद्रह लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से
सरकारी खजाने को सालाना 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि पुरानी कर व्यवस्था में
छूट और कटौतियों की करीब 100 व्यवस्थाएं हैं। नई सरल कर व्यवस्था में 70 तरह की छूट और कटौतियों को
हटाने का प्रस्ताव है। आगे चलकर शेष बची छूट और कटौती पर समीक्षा और जांच – पड़ताल की जाएगी। उन्होंने
उदाहरण देकर समझाया कि नई कर प्रणाली को अपनाने से सालाना 15 लाख रुपये की आय कमाने वाले को
78,000 रुपये की बचत होगी। नई कर व्यवस्था पुरानी कर व्यवस्था 0-2.5 लाख रुपये तक —- कर मुक्त 0-
2.5 लाख रुपये तक —- कर मुक्त 2.5-5 लाख तक ——– 5 प्रतिशत 2.5-5 लाख तक ——– 5 प्रतिशत 5
से 7.50 लाख तक —— 10 प्रतिशत 5 से 10 लाख तक —— 20 प्रतिशत 7.5 से 10 लाख तक —— 15
प्रतिशत 10 लाख रुपये से ऊपर- 30 प्रतिशत 10 से 12.5 लाख तक —– 20 प्रतिशत 12.5 से 15 लाख
तक —– 25 प्रतिशत 15 लाख रुपये से ऊपर की आय पर —- 30 प्रतिशत

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