CBI विवाद: जस्टिस एके पटनायक की निगरानी में CVC करेगी जांच

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सीबीआई में जारी घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्‍यवस्‍था देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक की निगरानी में सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्‍थाना के खिलाफ लगे आरोपों की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) दो हफ्तों में करेगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

जस्टिस अनंग कुमार पटनायक

1. 2009-14 के दौरान रिटायर्ड जस्टिस पटनायक (69) सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। 16 मार्च, 2012 को सुप्रीम कोर्ट के तत्‍कालीन चीफ जस्टिस एसएच कपाडि़या ने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम केस की जांच के लिए दो जजों की बेंच का गठन किया था। उस बेंच में जस्टिस एके पटनायक भी शामिल थे। उसी साल जस्टिस पटनायक ने एक अहम निर्णय देते हुए सरकार से समयबद्ध ढंग से महत्‍वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना प्रोजेक्‍ट पर काम करने के लिए उच्‍च अधिकार संपन्‍न कमेटी के गठन का निर्देश दिया था।

2. जस्टिस पटनायक का 3 जून, 1949 को ओडिशा के एक संभ्रांत परिवार में जन्‍म हुआ। 1974 में ओडिशा बार कौंसिल के सदस्‍य बने और हाई कोर्ट में वकालत शुरू की। 1994 में ओडिशा हाई कोर्ट के एडीशनल जज बने।

3. 2005 को पहले छत्‍तीसगढ़ और बाद में मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उस दौरान छत्‍तीसगढ़ हाई कोर्ट के कामकाज की तत्‍कालीन भारत के चीफ जस्टिस रमेश चंद्र लाहोटी ने प्रशंसा की थी। 17 नवंबर, 2009 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 2 जून, 2014 को रिटायर हुए। इस दौरान जब कलकत्‍ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ लगे आरोपों के मद्देनजर इन हाउस कमेटी का गठन किया गया, तो जस्टिस पटनायक भी उस कमेटी में शामिल थे। कमेटी ने जस्टिस सेन को दोषी पाया। बाद में जस्टिस सेन ने इस्‍तीफा दे दिया। जस्टिस पटनायक के रिटायरमेंट के बाद कहा जाता है कि उनको ओडिशा राज्‍य मानवाधिकार आयोग का चेयरमैन बनाया जा रहा था लेकिन उन्‍होंने इनकार कर दिया था।

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