सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरे को लेकर उपराज्यपाल से समिति गठित करने का आग्रह किया

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली में ठोस कचरे की समस्या ‘बहुत ही गंभीर’ है और इससे निबटने में जनता के सहयोग की आवश्यकता है। कोर्ट ने इसके साथ ही उपराज्यपाल से आग्रह किया कि इस पर गौर करने के लिये विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस समिति को गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल स्थानों की सफाई सहित ठोस कचरे के प्रबंधन से संबंधित मुद्दे के सभी पहलुओं पर गहराई से विचार करना चाहिए क्योंकि अब स्थिति बहुत ही गंभीर है।

पीठ ने कहा कि हम दिल्ली के उपराज्यपाल से एक समिति गठित करने का अनुरोध करते हैं जो गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल स्थलों की सफाई समेत ठोस कचरे के प्रबंधन से संबंधित मुद्दे के सभी पहलुओं पर गहराई से विचार करे। पीठ ने कहा कि इस समिति में विशेषज्ञों के साथ ही सिविल सोसायटी और रेजिडेन्ट वेलफ़ेयर एसोसिएशनों के सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है, इसलिए प्राधिकारियों को फैसला लेने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बल्कि इसके सभी पहलुओं का विश्लेषण करना चाहिए ताकि दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या पर सभी पक्षों, विशेषकर निवासियों, की संतुष्टि का ध्यान रखा जा सके।

पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में फैसला सहयोग पूर्ण होगा। उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिकी आनंद ने कहा कि वह इस मामले में उपराज्यपाल से मंत्रणा करके एक सप्ताह के भीतर न्यायालय के सूचित करेंगी।

पीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विज से कहा कि वह समिति के लिये सिविल सोसायटी से पांच व्यक्तियों और विशेषज्ञों के नामों का सुझाव दें। इस मामले में न्यायालय अब 27 अगस्त को विचार करेगा।

यह मामला 2015 में डेंगू से पीड़ित सात वर्षीय बच्चे की इलाज के अभाव में मृत्यु होने की खबर से संबंधित है। इस मामले में पांच निजी अस्पतालों ने कथित रूप से उसका इलाज करने से इनकार कर दिया था। संतान की मृत्यु से व्यथित माता पिता ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। शीर्ष कोर्ट ने इस खबर का स्वत: संज्ञान लिया था। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान ही दिल्ली में गंदगी और ठोस कचरे के निष्पादन का मामला न्यायालय के ध्यान में लाया गया था।

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