सीएए को लेकर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं विपक्षी दल : मोदी

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कोलकाता, 12 जनवरी (वेबवार्ता)। संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दावे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जवाब दिया है। बेलूर मठ में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एकत्रित भीड़ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकता अधिनियम पर राजनीति खेल कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। विपक्षी दल जान-बूझकर सीएए को समझना नहीं चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि यह अधिनियम केवल नागरिकता देने वाला है। सरकार ने इसमें कुछ भी नया नहीं किया है। मौजूद नागरिकता कानून में केवल संशोधन किया गया है।

प्रधानमंत्री शनिवार की शाम दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचे थे। यहां राजभवन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री संग बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब हुई ममता ने दावा किया था कि उन्होंने नागरिकता अधिनियम को लेकर अपना विरोध प्रधानमंत्री के समक्ष भी जताया है और इसे वापस लेने की मांग की है। इसी के परिपेक्ष्य में रविवार को प्रधानमंत्री का यह बयान अहम माना जा रहा है। नागरिकता अधिनियम पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपक्ष सिर्फ भ्रम फैला रहा है लेकिन हमारा युवा वर्ग इस बात को समझ रहा है और भ्रम को भी दूर करने का काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं फिर कहूंगा, सिटिजनशिप एक्ट, नागरिकता लेने का नहीं, नागरिकता देने का कानून है और सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, उस कानून में सिर्फ एक संशोधन है। दूसरे देश का कोई भी व्यक्ति जो भारत की संस्कृति में आस्था रखता है वो भारत की नागरिकता ले सकता है और सीएए इसी कानून में एक संशोधन है। नागरिकता अधिनियम प्रदेश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन और विपक्षी लामबंदी पर प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वो फिर एक बार दोहराना चाहेंगे कि सीएए नागरिकता देने के लिए है ना कि नागरिकता छीनने के लिए। बेलूर मठ में छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो महात्मा गांधी कह कर गए हैं हम तो सिर्फ उसका पालन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो व्यक्ति भारत के संविधान को मानता है वो तय प्रक्रियाओं का पालन कर भारत की नागरिकता ले सकते हैं।

पाकिस्तान पर भी बोला हमला : बेलूर मठ से अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर धार्मिक अत्याचार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून लाने के बाद पाकिस्तान को अब पूरी दुनिया को ये समझाना होगा कि उसने 70 साल तक पाकिस्तान के अंदर अल्पसंख्यकों पर इतने अत्याचार क्यों किए गए कि उन्हें भारत में आकर शरण लेनी पड़ी। प्रधानमंत्री का यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि 13 जनवरी यानी सोमवार को नई दिल्ली में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गैर भाजपा दलों की बैठक होनी है। इसमें संशोधित नागरिकता अधिनियम, एनआरसी के प्रस्तावित क्रियान्वयन और एनपीआर पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए आंदोलन की रणनीति बनेगी। हालांकि ममता बनर्जी इस बैठक में नहीं जाएंगी लेकिन उन्होंने भी दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वह अपने राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू नहीं होने देंगी।

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