पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा स्थापित शोध संस्था सीएपी का भूआवंटन सरकार ने रद्द किया

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संसद एवं संसद से बाहर राजनीतिक दलों की गतिविधियों के विश्लेषण एवं शोध के लिये पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा स्थापित संस्था ‘सेंटर आफ एप्लाइड पॉलिटिक्स’ (सीएपी) को मध्य दिल्ली में आवंटित भूखंड का आवंटन, सरकार ने संस्था द्वारा आवंटन शर्तों का उल्लंघन किए जाने के कारण रद्द कर दिया है। आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत भूमि एवं विकास विभाग ने सीएपी को 1977 में मध्य दिल्ली स्थित आईटीओ के पास आईपी इस्टेट में 2000 वर्ग गज का भूखंड आवंटित किया था, लेकिन कालांतर में यह संस्था कार्यरत नहीं होने और इसके नाम पर कुछ अन्य लोगों द्वारा भूआवंटन की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण विभाग ने इसका आवंटन रद्द कर दिया। भूमि एवं विकास अधिकारी अमित कटारिया द्वारा 12 फरवरी को जारी आदेश के अनुसार विभाग ने सीएपी का आवंटन रद्द कर संस्था द्वारा भूखंड पर किये गये अतिक्रमण को भी हटा दिया है। उल्लेखनीय है कि संस्था का संचालन आवंटित भूखंड पर निर्मित ‘नरेन्द्र निकेतन’ नामक अस्थायी भवन से किया जा रहा था। विभाग ने आदेश के अनुपालन में समूचे परिसर को गत सप्ताह शुक्रवार को खाली करा कर इसका कब्जा अपने क्षेत्राधिकार में ले लिया। आदेश में कहा गया है कि नरेन्द्र निकेतन परिसर में विभाग द्वारा 2015 और 2016 में किये गये निरीक्षण में भी संपत्ति का दुरुपयोग किए जाने की बात सामने आयी थी। सीएपी के महासचिव एच.एन शर्मा के नाम जारी आदेश के अनुसार, ‘‘सीएपी ‘नरेन्द्र निकेतन’ को भूखंड के आवंटन की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुये इसका आवंटन तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया गया है। आवंटन की शर्तों के मद्देनजर आवंटित भूखंड पर संस्था द्वारा किया गया अस्थायी
निर्माणकार्य और अन्य सामग्री आवंटी (विभाग) के क्षेत्राधिकार में आ जायेगी।’’ आदेश में आवंटन की शर्तों का उल्लेख करते हुये कहा गया है कि विभाग ने सीएपी को संस्थागत प्रयोग के लिये यह भूखंड 21 अप्रैल 1971 को अवंटित करते हुये इस पर एक कार्यालय और देश विदेश से आने वाले शोधार्थियों के ठहरने के लिये पांच कमरे बनाने की अनुमति दी गई थी। विभाग ने जरूरी औपचारिकतायें पूरी होने के बाद संस्था को भूखंड का कब्जा 25 अगस्त 1977 को सौंप दिया था। विभाग ने भूखंड पर अतिरिक्त निर्माण कार्य करने और नरेन्द्र निकेतन से समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) के नाम वाले एक राजनीतिक दल का संचालन करने को आवंटन शर्तों का गंभीर उल्लंघन बताते हुये आवंटन रद्द कर दिया। आवंटन रद्द करने से पहले विभाग द्वारा संस्था को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में प्रस्तुत पक्ष को विभाग ने मानने से इंकार करते हुए कहा कि शर्तों के मुताबिक संस्था को दो साल के भीतर भवन निर्माण कार्ययोजना का पालन करना था। लेकिन संस्था ने आवंटन के 42 वर्ष के दौरान न तो निर्माणकार्य किया ना ही ऐसी कोई मंशा दिखाई। आदेश के अनुसार संस्था ने इस बात का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है कि जिस संस्थागत उपयोग के मकसद से उसे भूखंड आवंटित किया गया है, उससे इस मकसद की पूर्ति के लिये कोई सार्थक काम किया गया है। संस्था इस बारे में कोई ठोस सबूत भी नहीं दे सकी।उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर के करीबी सहयोगी रहे शर्मा पहले ही मंत्रालय और विभाग को लिखित में सूचित कर चुके थे कि समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) और कुछ व्यक्तियों द्वारा नरेन्द्र निकेतन परिसर में अतिक्रमण कर लिया गया है। उन्होंने इसके मद्देनजर सीएपी के निष्क्रिय और अस्तित्वविहीन होने के कारण मंत्रालय से भूखंड का आवंटन निरस्त करने का अनुरोध किया था। शर्मा से पहले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सचिव रहे पी एस प्रसाद भी मंत्रालय से उक्त परिसर का कब्जा वापस लेने का अनुरोध किया था। शर्मा ने अपने प्रतिवेदन में दलील दी थी कि चंद्रशेखर ने पहले ही इच्छा जताई थी कि अगर सीएपी नरेन्द्र निकेतन अपने उद्देश्य के मुताबिक काम करने में
नाकाम रहे तो संस्था के नाम से दिया गया भूखंड सरकार को वापस कर दिया जाये।

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