जम्मू एवं कश्मीर : मार्च में होंगे पंचायत उपचुनाव, अनुच्छेद 370 हटने के बाद होगी पहली बड़ी राजनैतिक गतिविधि

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पिछले वर्ष अगस्त में जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने और उसे केंद्रशासित प्रदेश बना दिए जाने के बाद यह पहली बड़ी राजनैतिक गतिविधि होगी.

जम्मू एवं कश्मीर में पंचायत उपचुनाव मार्च में करवाए जाएंगे. करीब 13,000 रिक्त पंचायत सीटों के लिए यह चुनाव करवाया जाएगा. जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी ने यह ऐलान किया है. पिछले वर्ष अगस्त में जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने और उसे केंद्रशासित प्रदेश बना दिए जाने के बाद यह पहली बड़ी राजनैतिक गतिविधि होगी.  जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी शेलेंद्र कुमार ने बताया कि चुनाव आठ चरण में होंगे साथ ही गुरुवार से ही जम्मू कश्मीर में चुनाव आचार सहिंता भी लागू हो गई है. 

साल 2018 में हुए पंचायत चुनाव में दो प्रमुख पार्टी नेशनल कॉंफ्रेस और PDP ने चुनाव का बहिष्कार किया था जिसके बाद लगभग 12 हजार सीटे खाली रह गई थी. इधर कश्मीर के हालत का जायजा लेने के  लिए आए विदेशी राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल को सेना के अधिकारियों ने गुरूवार को सुरक्षा हालात के बारे में जानकारी दी.

जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जा वापस लिये जाने के छह महीने बाद केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति का मौके पर जाकर आकलन करने के उद्देश्य से 25 विदेशी राजनयिकों का दूसरा प्रतिनिधिमंडल बुधवार को कश्मीर पहुंचा था. राजनयिकों के इस दौरे का आयोजन केन्द्र सरकार ने किया था. अधिकारियों ने बताया कि यहां बदामी बाग कैंट में राजनयिकों को सुरक्षा हालात की जानकारी दी गई. उन्होंने बताया कि इसके बाद प्रतिनिधिमंडल जम्मू जाएगा.
इस दल में अफगानिस्तान, आस्ट्रिया, बुल्गारिया, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, डोमिनिकन रिपब्लिक, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, गिनिया गणराज्य, हंगरी, इटली एवं केन्या के राजदूत शामिल हैं.इसके अलावा किर्गिस्तान, मैक्सिको, नामीबिया, द नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पोलैंड, रवांडा, स्लोवाकिया, ताजकिस्तान, यूगांडा एवं उज्बेकिस्तान के राजदूत भी इस जत्थे के हिस्से के रूप में कश्मीर आए हैं.

गौरतलब है कि पिछले एक महीने में केंद्र शासित प्रदेश के दौरे पर आए विदेश राजनयिकों का यह दूसरा जत्था है.
इससे पहले सरकार 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू कश्मीर के दौरे पर ले गई थी जिसका लक्ष्य उन्हें यह दिखाना था कि कश्मीर घाटी में हालात सामान्य करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. अनेक विपक्षी दलों ने इसे ‘‘गाइडेड टूर” बताया है.

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