एयर इं‎डिया में ‎49 फीसदी ‎हिस्सेदारी ही खरीद सकेंगी ‎विदेशी कंप‎नियां

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नई दिल्ली, 13 जनवरी विदेशी कंपनियों को सरकारी ‎विमानन कंपनी एयर इंडिया में 49 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी के लिए बोली लगाने का मौका नहीं मिलेगा। उन्हें इस विमानन कंपनी पर पूरा संचालन हासिल नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि नागर विमानन मंत्रालय ने सब्सटेंशियल ओनरशिप ऐंड इफेक्टिव कंट्रोल (एसआइईसी) क्लॉज में ढील देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। सरकार एयर इंडिया का निजीकरण करना चाहती है। इससे पहले 2018 में इसमें स्टेक बेचने की सरकारी कोशिश नाकाम हो गई थी। एक व‎रिष्ठ अधिकारी ने बताया ‎‎कि एसओईसी नियमों में ढील देने का एक प्रस्ताव था, लेकिन विमानन मंत्रालय ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि इससे एयरलाइन सेक्टर विदेशियों के हाथ में चला जाएगा और इसका अर्थ यह होगा कि भारत में काम कर रहीं एयरलाइंस पर भारत सरकार का कंट्रोल समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा ‎कि कोई भी देश अपनी एयरलाइंस पर कंट्रोल खोना ठीक नहीं समझता। एसओईसी क्लॉज से यह सुनिश्चित होता है कि भारत में काम कर रहीं एयरलाइंस पर भारतीय नागरिक ही इसका पूरा संचालन करे। इसके मुताबिक विमानन कंपनियों के निदेशक मंडल में दो तिहाई सदस्य और चेयरमैन भारतीय होने चाहिए। यह नियम 49 प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी वाली एयरलाइंस पर भी लागू होता है। विमानन कंपनियों का संचालन मुख्यालय भी भारत में होने चाहिए। इस सुझाव पर सरकार ने विचार किया था, लेकिन इसे गृह मंत्रालय की अगुवाई वाली उस कमेटी के सामने इसे नहीं रखा गया जो एयर इंडिया की बिक्री से जुड़ा मामला देख रही है।

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