घाटी के अलगाववादी नेता पाकिस्तान की अनुमति के बिना टॉयलेट भी नहीं जाते: जम्मू कश्मीर गवर्नर

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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से कहा था बातचीत के माध्यम से नई दिल्ली से रियायत हासिल करे, क्योंकि भारत एक सुपरपावर है और वह उसे तोड़ने में सक्षम नहीं है। मुशर्रफ ने कहा था कि वह लाइन ऑफ कंट्रोल को बदलने में सक्षम नहीं है। मुशर्रफ कश्मीरी अलगाववादियों से कहा था कि न तो भारत और न ही पाकिस्तान युद्ध को वहन कर सकता है।

अंग्रेजी डेली ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में राज्यपाल मलिक ने कहा, ‘मैं सो फीसदी सुनिश्चित हूं कि कुछ महत्वपूर्ण लोगों ने मुझसे कहा कि मुशर्रफ ने उनसे कहा था कि वह उस स्थिति में नहीं है कि एलओसी को बदल दें।’ मुशर्रफ ने हुर्रियत नेताओं से लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनो तरफ से बातचीत और समझौते के लिए कहा था।

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने आगे कहा कि पाकिस्तान की अनुमति के बिना घाटी के हुर्रियत नेता टॉयलेट करने भी नहीं जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘ जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान मुश्किलें खड़ी करने वालों में से है, न कि हितों के लिए काम करता है।’ पीडीपी से गठबंधन से टूटने के बाद से जम्मू कश्मीर में जून से राज्यपाल शासन है। केंद्र ने अगस्त में सत्यपाल मलिक को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया था।

मलिक ने कहा कि हुर्रियत कांफ्रेंस से घाटी में कुछ प्रभाव पड़ा है, लेकिन वे पाकिस्तान और आतंकवादियों से डरते हैं और कहा कि यदि हुर्रियत अपना स्वतंत्र स्टैंड ले, तभी सरकार उनसे बातचीत कर सकती है। नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने संवाददाता और पूर्व खुफिया ब्यूरो के प्रमुख दिनेश्वर शर्मा के माध्यम से अलगाववादियों के साथ वार्ता शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने बातचीत के टेबल पर आने से इनकार कर दिया। आखिरी बार जब उन्होंने नई दिल्ली के साथ वार्ता में हिस्सा लिया था, तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी।

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